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राष्ट्रीय संसद

लोकसभा ने Aadhaar संशोधन विधेयक को किया पास


Aadhaar and other Laws Amendment Bill-2018 लोकसभा ने आधार और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक-2018 को पास कर दिया है. इसमें नाबालिगों को 18 वर्ष की उम्र पूरी करने पर अपनी आधार (Aadhaar) संख्या रद्द करने का विकल्प दिया गया है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसकी जानकारी दी.

लोकसभा ने शुक्रवार को आधार और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक-2018 (The Aadhaar and Other Laws (Amendment) Bill-2018) को पास कर दिया है. इसमें बालकों को 18 वर्ष की उम्र पूरी होने पर अपनी आधार (Aadhaar) संख्या रद्द करने का विकल्प देने और निजी अस्तित्वों द्वारा आधार के उपयोग से संबंधित आधार अधिनियम की धारा का लोप करने का प्रावधान है. विधेयक में नागरिकों की निजता सुरक्षित रखने और दुरुपयोग को रोकने को भी ध्यान में रखा गया है. सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि देश के 130 करोड़ लोगों में से 123 करोड़ लोगों ने आधार को स्वीकार किया है.

उन्होंने कहा कि Aadhaar के जरिए डायरेक्ट ट्रांसफर (Direct transfer) के कारण देश को 90 हजार करोड़ रुपये का फायदा हुआ है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक पारित किया गया है. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया गया कि बैंकों और मोबाइल कंपनियों में केवाईसी फॉर्म में Aadhaar वैकल्पिक होगा. Aadhaar बाध्याकारी नहीं होगा. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी Aadhaar नहीं होने की वजह से सरकारी योजनाओं से वंचित न रह जाए.

विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए बीजू जनता दल के तथागत सतपति ने कहा कि Aadhaar को पहचान पत्र के रूप में देखना गलत है. देश में कई हिस्सों से ऐसी खबरें आई हैं कि Aadhaar नहीं होने की वजह से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि 90 हजार करोड़ रुपये बचाने का दावे का क्या प्रमाण है? भाजपा के शरद त्रिपाठी और भैरों प्रसाद मिश्रा ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे आम जनता के हित में करार दिया. मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनमति से अपनी स्वीकृति प्रदान की.

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया कि Aadhaar Act-2016 भारत में निवास करने वाले व्यक्तियों को सुशासन, विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करके ऐसी सुविधाओं और सेवाओं के कुशल, पारदर्शी और लक्षित परिदान के लिए व इनसे संबंधित विषयों का उपबंध करने के लिए किया गया था. वर्ष 2018 में 27 जुलाई को जस्टिस रिटायर बीएन श्रीकृष्णा की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञों की समिति ने प्रारूप व्यक्तिगत डाटा सुरक्षा विधेयक के साथ डाटा सुरक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों के संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और आधार अधिनियम में कुछ संशोधन सुझाए.

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक खंडपीठ ने जस्टिस केएस पुट्टास्वामी (सेवानिवृत) और अन्य बनाम भारतीय संघ व अन्य के निर्णय में 24 अगस्त 2017 को निजता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मूल अधिकार घोषित किया. इसके अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 के निर्णय द्वारा कुछ निर्वधनों और परिवर्तनों के साथ अधिनियम की संवैधानिक वैधता की पुष्टि की.

इसमें कहा गया कि 122 करोड़ से अधिक आधार संख्या जारी की जा चुकी है. भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न प्रयोजनों के लिए पहचान के सबूत के रूप में आधार के व्यापक उपयोग को ध्यान में रखते हुए आधार के प्रचालन के लिए विनियामक ढांचा होना जरूरी है. इसलिए प्राधिकरण के पास प्रवर्तन कार्रवाई करने के लिए विनियामक शक्तियां होनी चाहिए.

इस विधेयक में प्रावधान किया गया कि आधार संख्या धारण करने वाले बालकों को 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर अपनी आधार संख्या रद्द करने का विकल्प होगा. अधिप्रमाणन या ऑफलाइन सत्यापन या किसी अन्य ढंग से भौतिक या इलेक्ट्रानिक रूप में आधार संख्या के स्वैच्छिक उपयोग के लिए उपबंध करना, आधार संख्या के ऑफलाइन सत्यापन का अधिप्रमाणन केवल आधार संख्या धारक की सूचित सहमति से किया जा सकता है. इसमें निजी अस्तित्वों द्वारा आधार के उपयोग से संबंधित आधार अधिनियम की धारा का लोप करने का प्रावधान है.

 

साभार ; आजतक


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