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दिल्ली सरकार ने HC में खुद कबूला, सरकारी अस्पतालों के 52 वेंटिलेटर खराब


दिल्ली सरकार ने यह जानकारी तीन साल के एक बच्चे को बेहद खराब और चिंताजनक हालत के बावजूद वेंटिलेटर नहीं मिलने के आरोप के बाद हाई कोर्ट की ओर से वेंटिलेटर्स को लेकर मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट के बाद हलफनामा दाखिल की है. वेंटिलेटर समय पर नहीं मिलने के बाद हाल ही में इस बच्चे की मौत हो गई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने इसके लिए दिल्ली सरकार को फटकार लगाई थी.

 

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर को लेकर मांगी गई रिपोर्ट पर दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि उसके अस्पतालों में 400 वेंटिलेटर वाले बेड हैं, जिसमें से 300 आईयूसी में और 109 आईसीयू में हैं. इनमें से 52 वेंटिलेटर खराब हैं, जिसे तुरंत मरम्मत कराने को कहा गया है. इसके अलावा 18 और वेंटिलेटर खरीदे जा रहे हैं.

दिल्ली सरकार ने यह जानकारी तीन साल के एक बच्चे को बेहद खराब और चिंताजनक हालत के बावजूद वेंटिलेटर नहीं मिलने के आरोप के बाद हाई कोर्ट की ओर से वेंटिलेटर्स को लेकर मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट के बाद हलफनामा दाखिल की है. वेंटिलेटर समय पर नहीं मिलने के बाद हाल ही में इस बच्चे की मौत हो गई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने इसके लिए दिल्ली सरकार को फटकार लगाई थी और अस्पतालों में मुहैया कराई जा रही सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देने को कहा था.

आम आदमी पार्टी की सरकार ने उसके जवाब में यह भी कहा है कि अस्पतालों में खाली बेड को लेकर तात्कालिक जानकारी दिया जाना व्यवहारिक नहीं है जबकि नियम के मुताबिक दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन को अस्पतालों में उपलब्ध बेड और वेंटिलेटर को लेकर ऑनलाइन वेब पोर्टल बनाने को कहा गया है जिससे आम लोगों को इसके बारे में जानकारी हो सके. अब भी वेब पोर्टल बनाए जाने में दो महीने का समय लग सकता है.

अरविंद केजरीवाल सरकार ने अपने पक्ष में तर्क देते हुए सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि उसके स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय में कंट्रोल रूम है जो सभी अस्पतालों से खाली बेड और बाकी की और जानकारी लेता है. दिल्ली सरकार ने कोर्ट में कंट्रोल रूम के जो नंबर दिए हैं वह ये 011-22300012, 22307145 हैं. वहां से आम जनता 24 घंटे जानकारी ले सकते हैं, लेकिन अक्सर स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े फोन नंबर को लेकर आम जनता का फीडबैक बेहद बुरा रहा है.

अक्सर शिकायत रहती है कि इन नंबरों को या तो कोई उठाता ही नहीं या जानकारी पूरी नहीं दी जाती. हाई कोर्ट ने 30 जनवरी को अस्पताल से मासूम फरहान को वेंटिलेटर उपलब्ध कराने को कहा था. बाद में बच्चे फरहान को वेंटिलेटर मुहैया कराया गया, लेकिन 10 फरवरी को उसकी मौत हो गई.

बच्चे के लिए इस मामले में याचिका लगा कर हाई कोर्ट तक इस मामले को लाने वाले वकील अशोक अग्रवाल ने कोर्ट को बताया था कि एलएनजेपी अस्पताल में 2,053 बिस्तर हैं लेकिन वहां केवल 102 वेंटिलेटर है और उसमें से 12 खराब हैं.

 

साभार : आजतक


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