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दिल्ली की सड़कों पर उतरे देश भर के किसान बोले- अयोध्या नहीं, क़र्ज़ माफ़ी


गुरुवार को रामलीला मैदान में देश के विभिन्न हिस्सों से आए किसानों ने कहा कि उन्हें राम मंदिर या राम मूर्ति के बजाय क़र्ज़ माफ़ी और अपने उत्पादों का लाभकारी मूल्य चाहिए.

नई दिल्ली: अपनी मांगों को लेकर किए जा रहे दो दिवसीय प्रदर्शन के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों से किसान बृहस्पतिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए थे. प्रदर्शनकारी कर्ज माफी और अपने उत्पादों के लिए उचित दाम की मांग कर रहे हैं.

बृहस्पतिवार को रामलीला मैदान और शुक्रवार को संसद मार्ग तक मार्च के लिए आए किसान आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं.

देश के विभिन्न हिस्सों से आए किसानों ने कहा कि उन्हें राम मंदिर या राम मूर्ति के बजाय कर्ज माफी और अपने उत्पादों का लाभकारी मूल्य चाहिए.

रामलीला मैदान में उत्तर प्रदेश से आए किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हमारे लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है लेकिन सरकार राम मंदिर के जरिए लोगों का ध्यान किसानों के मुद्दों से भटकाना चाहते हैं.

आनंद विहार, निजामुद्दीन और बिजवासन रेलवे स्टेशनों और सब्जी मंडी से चलकर चार अलग-अलग मार्गों से किसान जब रामलीला मैदान की ओर बढ़े तो कई जगहों पर ट्रैफिक बाधित हुआ.

बता दें कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे किसान ट्रेनों, बसों एवं अन्य परिवहन माध्यमों से दिल्ली पहुंचे. एआईकेएससीसी किसानों एवं खेतिहर कामगारों के 209 संगठनों की संयुक्त संस्था है.

ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) नेता अतुल अंजान ने कहा, ‘दिल्ली जल बोर्ड हमें पानी मुहैया करा रहा है. आम आदमी पार्टी के विधायक हमें खाना मुहैया करा रहे हैं. दिल्ली के पांच गुरुद्वारा ने किसानों की मदद कर रहे हैं.’

किसानों के नेताओं ने बताया कि दिल्ली, पंजाब एवं हरियाणा के किसान गुरुवार सुबह साढ़े दस बजे इकट्ठा होना शुरू हो गए. अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) की दिल्ली इकाई की पदाधिकारी कमला ने बताया कि नजदीकी इलाकों के किसान दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित मजनूं का टीला में इकट्ठा हुए और वहां से वे समूहों में रामलीला मैदान की ओर गए.

नेशनल साउथ इंडियन रिवर इंटर-लिंकिंग एग्रीकल्चरलिस्ट्स असोसिएशन के करीब 1,200 सदस्य खुदकुशी कर चुके अपने दो साथियों की खोपड़ी लेकर गुरुवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे.तमिलनाडु से आए किसानों के समूह ने कहा है कि यदि शुक्रवार को उन्हें संसद नहीं जाने दिया गया तो वे नग्न प्रदर्शन करेंगे.

एआईकेएससीसी ने कहा है कि दो दिवसीय मार्च दिल्ली में किसानों का सबसे बड़ा प्रदर्शन है. गुरुवार को रामलीला मैदान में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण भारत के कई जाने माने गायक एवं कवियों ने प्रस्तुति दिया.

पुलिस ने बताया कि उसने शुक्रवार की रैली के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं. स्वराज इंडिया के नेता योगेन्द्र यादव और जाने माने वकील प्रशांत भूषण ने किसानों के प्रति समर्थन व्यक्त किया है.

इससे पहले बीते 22 नवंबर सूखे के लिए मुआवज़े और आदिवासियों को वन्य अधिकार सौंपे जाने की मांग को लेकर हज़ारों किसान एवं आदिवासियों ने महाराष्ट्र के ठाणे से मार्च करते हुए दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान पहुंचे. आठ महीने पहले भी किसान नासिक से ऐसा ही मार्च निकालकर मुंबई पहुंचे थे.

 

साभार : द वायर


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